तुम जाने की बातें, क्यों करते हो,
थोड़ी देर हुआ, तो तुम्हारे आए,
फिर क्यों जाने को कहते हो,
अभी तो वक्त बाकी है।
कितनी बातें अधूरी है,
अभी तो शुरू हुआ बोलना।
और, तुम्हारी भी तो सुनना है।
तुम क्या बोल रहे थे,
इतना चुप क्यों रहते हो आदित,
किसी ने कुछ कहा क्या?
फिर क्यों जाने को कहते हो,
अभी तो वक्त बाकी है।
कल बाग लगाया था,
आज उजाड़ रहे हो।
तुम्हे ख्याल रखना था,
तुम ही मार रहे हो।
सुबह देखा था,
कितने खुस थे, अभी क्या हुआ,
आंसू क्यों छुपा रहे हो।
अभी तो आए हो, अभी जा रहे हो।
फिर क्यों जाने को कहते हो,
अभी तो वक्त बाकी है।
कितना कुछ करना है,
बचपन में कहते थे,
पहाड़, पठार, रेगिस्तान,
नदी, समुंदर, सागर,
क्या सब देख लिए ?
फिर, क्यों जाने को कहते हो,
अभी तो वक्त बाकी है।
सही कहा तुमने, कहानी बाकी है,
जिंदगी और जवानी बाकी है,
मैं भी कहता हु, अभी वक्त बाकी है।
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