Hindi-Poetry

Aditsblogs - fourmie-5061910_1920

MEHNAT

ज़मीन बंजर ही होती है, खाद और पसीने से, उसको सिचा जाता है, तो हरियाली होती है। सपने सिर्फ देखा

pehli mulaqat

Pehli Mulaqat

Pehli Mulaqat खुशी थी, हल्की उदासी थी, शायद ऐसी ही हमारी कहानी थी. मिलना भी था, बिछड़ना भी था, ना

जो अच्छी लगीं तुम

Kyun achi lagi tum

पहली नज़र का प्यार ना ही सही, कुछ तो  हुआ था, तुम्हे देखकर। सबसे अलग ,सबसे जुदा लगी तुम, यही

habits, मैं निकल चला हूं

मैं निकल चला हूं

खुद की तलाश में अपनी पहचान में, भीड़ को पीछे छोड़, में निकल चला हूं। लोगों की छोटी सोच से,